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प्राचीन भारत का इतिहास : मगध राज्य का उत्कर्ष काल (Magadha Empire Rise)


बृहद्रथ वंश से नंद वंश तक सम्पूर्ण अध्ययन 

प्राचीन भारत के इतिहास में मगध का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। छठी शताब्दी ईसा पूर्व में महाजनपदों के युग में मगध सबसे शक्तिशाली राज्य के रूप में उभरा। आगे चलकर यही राज्य भारतीय उपमहाद्वीप के प्रथम विशाल साम्राज्य का आधार बना। बृहद्रथ, हर्यक, शिशुनाग और नंद वंशों के शासनकाल में मगध ने राजनीतिक, सैन्य एवं आर्थिक दृष्टि से अभूतपूर्व उन्नति की।

1. मगध राज्य का परिचय

मगध प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में सबसे शक्तिशाली महाजनपद था।

भौगोलिक स्थिति

  • वर्तमान दक्षिणी बिहार इसका मुख्य क्षेत्र था।
  • उत्तर में गंगा नदी
  • दक्षिण में विंध्य पर्वत
  • पूर्व में चम्पा नदी
  • पश्चिम में सोन नदी

मगध के उत्कर्ष के कारण

  1. उपजाऊ गंगा का मैदान।
  2. लौह अयस्क की प्रचुरता।
  3. हाथियों की उपलब्धता।
  4. व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण।
  5. योग्य एवं महत्वाकांक्षी शासक।

2. बृहद्रथ वंश (Brihadratha Dynasty)

मगध का सबसे प्राचीन ज्ञात राजवंश बृहद्रथ वंश माना जाता है।

संस्थापक

बृहद्रथ

राजधानी

राजगृह (प्राचीन नाम – गिरिव्रज या गिरिब्रज)

प्रमुख शासक

जरासंध

महाभारत के अनुसार जरासंध बृहद्रथ का पुत्र था तथा अत्यंत शक्तिशाली शासक माना जाता था।

परीक्षा तथ्य

  • जरासंध की राजधानी गिरिव्रज थी।
  • महाभारत में उसका उल्लेख कौरवों के सहयोगी के रूप में मिलता है।

3. हर्यक वंश (Haryanka Dynasty)

संस्थापक – बिम्बिसार (544 ई.पू.)

बौद्ध ग्रंथों के अनुसार 544 ईसा पूर्व में बिम्बिसार मगध की गद्दी पर बैठा।

बिम्बिसार की उपलब्धियाँ

(1) अंग राज्य की विजय

बिम्बिसार ने अंग के राजा ब्रह्मदत्त को पराजित कर अंग राज्य को मगध में मिला लिया।

(2) राजधानी का विकास

उसने राजगृह को सुदृढ़ बनाकर अपनी राजधानी बनाया।

(3) प्रशासनिक सुधार

बिम्बिसार को भारत के प्रारम्भिक संगठित प्रशासनिक शासकों में गिना जाता है।

(4) वैवाहिक संबंधों द्वारा विस्तार

बिम्बिसार ने कई महत्वपूर्ण वैवाहिक संबंध स्थापित किए—

विवाहसंबंधित राज्य
महाकोशलाकोशल
चेल्लनावैशाली (लिच्छवि)
क्षेमामद्र (पंजाब)

(5) धार्मिक दृष्टिकोण

  • बिम्बिसार भगवान बुद्ध का समकालीन था।
  • उसने बौद्ध संघ को संरक्षण दिया।
  • बौद्ध भिक्षुओं को निःशुल्क जल-यात्रा की सुविधा प्रदान की।

(6) जीवक का उल्लेख

राजवैद्य जीवक बिम्बिसार के दरबार में था।
उसने भगवान बुद्ध तथा अवन्ति के राजा प्रद्योत का उपचार किया।

शासनकाल

लगभग 52 वर्ष।

4. अजातशत्रु (493–461 ई.पू.)

बिम्बिसार का पुत्र अजातशत्रु (Ajatashatru) था।

सत्ता प्राप्ति

परंपरागत विवरणों के अनुसार अजातशत्रु ने अपने पिता बिम्बिसार को कारागार में डाल दिया, जहाँ उनकी मृत्यु हुई। इसके बाद वह मगध का शासक बना।

प्रमुख उपलब्धियाँ

(1) वैशाली पर विजय

अजातशत्रु ने लिच्छवि गणराज्य तथा वैशाली को पराजित किया।

(2) मंत्री वर्षकार (वस्सकार)

उसका प्रमुख मंत्री वर्षकार (वस्सकार) था, जिसने वैशाली विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

(3) युद्ध तकनीक

अजातशत्रु ने दो नए युद्धास्त्रों का प्रयोग किया—

  • रथमुषल (Rathamusala)
  • महाशिलाकंटक (Mahashilakantaka)

(4) धार्मिक महत्व

भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद आयोजित प्रथम बौद्ध संगीति का संरक्षण अजातशत्रु ने किया।

शासनकाल

लगभग 32 वर्ष।

5. उदायिन (उदयन)

उत्तराधिकार

461 ईसा पूर्व के आसपास उदायिन मगध की गद्दी पर बैठा।

प्रमुख उपलब्धियाँ

(1) पाटलिपुत्र की स्थापना

उदायिन ने गंगा और सोन नदियों के संगम क्षेत्र में पाटलिग्राम को विकसित किया।

आगे चलकर यही नगर पाटलिपुत्र कहलाया।

पाटलिपुत्र प्राचीन भारत की सबसे महत्वपूर्ण राजधानियों में से एक बना।

(2) धार्मिक झुकाव

उदायिन को जैन धर्म का अनुयायी माना जाता है।

मृत्यु

अवन्ति के गुप्तचरों द्वारा उसकी हत्या कर दी गई।

6. हर्यक वंश का अंतिम शासक

नागदशक

उदायिन का पुत्र नागदशक हर्यक वंश का अंतिम शासक था।

उसके शासन से असंतुष्ट अमात्यों ने उसे पदच्युत कर दिया।

7. शिशुनाग वंश (412 ई.पू.)

संस्थापक – शिशुनाग

412 ईसा पूर्व के आसपास शिशुनाग ने हर्यक वंश का अंत कर शिशुनाग वंश की स्थापना की।

राजधानी

शिशुनाग ने राजधानी को पाटलिपुत्र से हटाकर वैशाली बनाया।

प्रमुख उपलब्धियाँ

अवन्ति का विलय

शिशुनाग ने मगध के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी राज्य अवन्ति को पराजित कर मगध साम्राज्य में मिला लिया।

इस विजय के बाद मगध उत्तरी भारत की सबसे बड़ी शक्ति बन गया।

8. कालाशोक (काकवर्ण)

शिशुनाग का उत्तराधिकारी कालाशोक था।

प्रमुख कार्य

  • राजधानी को पुनः पाटलिपुत्र ले गया।
  • उसके शासनकाल में द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन वैशाली में हुआ।

परीक्षा तथ्य

द्वितीय बौद्ध संगीति लगभग 383 ईसा पूर्व में आयोजित हुई थी।

9. शिशुनाग वंश का अंतिम शासक

नन्दिवर्धन (कुछ स्रोतों में महानंदिन का उल्लेख मिलता है) को शिशुनाग वंश का अंतिम शासक माना जाता है।

इसके बाद मगध में नंद वंश का उदय हुआ।

10. नंद वंश (Nanda Dynasty)

संस्थापक – महापद्मनंद

महापद्मनंद को नंद वंश का संस्थापक माना जाता है।

उपाधि

  • "सर्वक्षत्रान्तक"
  • "एकराट"

प्रमुख उपलब्धियाँ

  • अनेक क्षत्रिय राज्यों को पराजित किया।
  • विशाल साम्राज्य की स्थापना की।
  • शक्तिशाली सेना का संगठन किया।

यूनानी विवरण

यूनानी लेखकों के अनुसार नंदों के पास विशाल सेना थी।

11. घनानंद – नंद वंश का अंतिम शासक

घनानंद नंद वंश का अंतिम और सबसे प्रसिद्ध शासक था।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • वह सिकंदर महान का समकालीन था।
  • उसकी विशाल सेना के कारण सिकंदर की सेना आगे बढ़ने से हिचकिचाई।

नंद वंश का पतन

चन्द्रगुप्त मौर्य ने आचार्य चाणक्य की सहायता से घनानंद को पराजित किया।

लगभग 322 ईसा पूर्व में नंद वंश का अंत हुआ और मौर्य वंश की स्थापना हुई।

वंशवार सारणी

वंशसंस्थापकराजधानी
बृहद्रथ वंशबृहद्रथगिरिव्रज (राजगृह)
हर्यक वंशबिम्बिसारराजगृह
शिशुनाग वंशशिशुनागवैशाली
नंद वंशमहापद्मनंदपाटलिपुत्र

परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर (GK)

क्र.सं.प्रश्नउत्तर
1मगध का सबसे प्राचीन वंश कौन-सा था?बृहद्रथ वंश
2बृहद्रथ वंश की राजधानी क्या थी?गिरिव्रज (राजगृह)
3हर्यक वंश का संस्थापक कौन था?बिम्बिसार
4अंग राज्य को मगध में किसने मिलाया?बिम्बिसार
5अजातशत्रु का प्रमुख मंत्री कौन था?वर्षकार (वस्सकार)
6पाटलिपुत्र की स्थापना किसने की?उदायिन
7हर्यक वंश का अंतिम शासक कौन था?नागदशक
8शिशुनाग वंश का संस्थापक कौन था?शिशुनाग
9द्वितीय बौद्ध संगीति किसके शासनकाल में हुई?कालाशोक
10नंद वंश का संस्थापक कौन था?महापद्मनंद
11नंद वंश का अंतिम शासक कौन था?घनानंद
12घनानंद को किसने पराजित किया?चन्द्रगुप्त मौर्य
13सिकंदर का समकालीन मगध शासक कौन था?घनानंद
14मौर्य वंश की स्थापना किसने की?चन्द्रगुप्त मौर्य
15प्रथम बौद्ध संगीति किसके संरक्षण में हुई?अजातशत्रु

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