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प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत (Sources of Ancient Indian History) – सम्पूर्ण अध्ययन

इतिहास – प्राचीन भारत

प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत

प्राचीन भारतीय इतिहास के विषय में जानकारी मुख्यतः निम्नलिखित चार प्रमुख स्रोतों से प्राप्त होती है—

  1. धार्मिक साहित्य (धर्मग्रंथ)
  2. ऐतिहासिक एवं लौकिक साहित्य
  3. विदेशी यात्रियों एवं लेखकों के विवरण
  4. पुरातात्त्विक साक्ष्य

इन स्रोतों के आधार पर इतिहासकार भारत की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक परिस्थितियों का पुनर्निर्माण करते हैं।

धर्मग्रंथ एवं ऐतिहासिक ग्रंथों से प्राप्त जानकारी

भारत का सर्वप्राचीन धार्मिक साहित्य वेद हैं। भारतीय परंपरा के अनुसार वेदों के संकलनकर्ता महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास माने जाते हैं। वेदों को "अपौरुषेय" अर्थात् मानव-रचित नहीं तथा "नित्य" माना गया है।

वेदों में वर्णित "वसुधैव कुटुम्बकम्" का आदर्श सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मानने की भावना को व्यक्त करता है।

चार वेद

  1. ऋग्वेद
  2. यजुर्वेद
  3. सामवेद
  4. अथर्ववेद

इन चारों को सामूहिक रूप से संहिता कहा जाता है।

ऋग्वेद

ऋचाओं के क्रमबद्ध संग्रह को ऋग्वेद कहा जाता है।

प्रमुख तथ्य

  • यह विश्व का सर्वप्राचीन उपलब्ध ग्रंथ माना जाता है।
  • इसमें 10 मंडल, 1028 सूक्त तथा लगभग 10,600 ऋचाएँ हैं।
  • इसकी भाषा वैदिक संस्कृत है।
  • यह प्रारम्भिक वैदिक आर्यों के जीवन, समाज, राजनीति एवं धर्म का प्रमुख स्रोत है।

महत्वपूर्ण विवरण

  • ऋग्वेद के तृतीय मंडल में महर्षि विश्वामित्र द्वारा रचित प्रसिद्ध गायत्री मंत्र मिलता है।
  • नवम मंडल पूर्णतः सोम देवता को समर्पित है।
  • अष्टम मंडल की कुछ अतिरिक्त ऋचाओं को "खिल" कहा जाता है।
  • दशम मंडल में वर्णित पुरुषसूक्त से चातुर्वर्ण व्यवस्था (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र) का उल्लेख मिलता है।

वामनावतार का प्राचीनतम उल्लेख

भगवान विष्णु के वामनावतार तथा उनके तीन पगों की कथा का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है।

देवताओं का उल्लेख

  • इन्द्र के लिए लगभग 250 ऋचाएँ
  • अग्नि के लिए लगभग 200 ऋचाएँ

ऐतिहासिक महत्व

ऋग्वेद से प्राप्त जानकारी—

  • आर्यों का प्रारम्भिक निवास
  • जन, विश, गण जैसी राजनीतिक संस्थाएँ
  • सभा एवं समिति
  • दशराज्ञ युद्ध
  • प्रारम्भिक वैदिक समाज

परीक्षा उपयोगी तथ्य

प्राचीन इतिहास के साधन के रूप में वैदिक साहित्य में ऋग्वेद के बाद शतपथ ब्राह्मण का विशेष महत्व माना जाता है।

यजुर्वेद

यज्ञों में प्रयुक्त मंत्रों तथा अनुष्ठानिक नियमों का संग्रह यजुर्वेद कहलाता है।

प्रमुख तथ्य

  • इसके पाठकर्ता को अध्वर्यु कहा जाता है।
  • यज्ञ-विधि का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ।
  • गद्य और पद्य दोनों रूपों में रचित।
  • दो प्रमुख शाखाएँ—
    • कृष्ण यजुर्वेद
    • शुक्ल यजुर्वेद

ऐतिहासिक महत्व

यज्ञ प्रणाली, वैदिक कर्मकांड तथा सामाजिक संरचना की जानकारी प्रदान करता है।

सामवेद

"साम" का अर्थ है—गान या संगीत।

प्रमुख तथ्य

  • इसमें मुख्यतः ऋग्वेद के मंत्रों को संगीतबद्ध रूप में प्रस्तुत किया गया है।
  • इसके पाठकर्ता को उद्गाता कहा जाता है।
  • इसे भारतीय संगीत का मूल स्रोत माना जाता है।

महत्व

भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा का प्रारंभिक आधार सामवेद को माना जाता है।

नोट: यजुर्वेद एवं सामवेद में किसी विशेष ऐतिहासिक घटना का विस्तृत वर्णन नहीं मिलता।

अथर्ववेद

अथर्व ऋषि से संबंधित यह वेद वैदिक कालीन सामान्य जनता के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है।

प्रमुख तथ्य

  • इसमें 20 काण्ड, लगभग 731 सूक्त एवं लगभग 6000 मंत्र हैं।
  • इसमें जादू-टोना, तंत्र-मंत्र, चिकित्सा, रोग-निवारण तथा लोकविश्वासों का उल्लेख मिलता है।

पृथ्वी सूक्त

अथर्ववेद का प्रसिद्ध पृथ्वी सूक्त मानव जीवन के अनेक पक्षों का वर्णन करता है—

  • कृषि
  • गृह निर्माण
  • व्यापार
  • विवाह
  • चिकित्सा
  • औषधियाँ
  • सामाजिक समन्वय

ऐतिहासिक महत्व

  • राजा परीक्षित का उल्लेख
  • कुरु राज्य की समृद्धि का वर्णन
  • सभा एवं समिति को प्रजापति की दो पुत्रियाँ कहा गया है

परीक्षा उपयोगी तथ्य

  • सर्वप्राचीन वेद — ऋग्वेद
  • सर्वाधिक उत्तरकालीन वेद — अथर्ववेद

वेदांग

वेदों को समझने हेतु छह वेदांगों की रचना हुई—

  1. शिक्षा
  2. कल्प
  3. व्याकरण
  4. निरुक्त
  5. छंद
  6. ज्योतिष

ब्राह्मण, आरण्यक एवं उपनिषद

ब्राह्मण ग्रंथ

यज्ञों की व्याख्या करने वाले ग्रंथ ब्राह्मण कहलाते हैं।

महत्वपूर्ण ब्राह्मण—

  • ऐतरेय ब्राह्मण
  • कौषीतकि ब्राह्मण
  • शतपथ ब्राह्मण
  • तैत्तिरीय ब्राह्मण

शतपथ ब्राह्मण

यह वैदिक काल के अध्ययन का अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत है।

  • इसमें स्त्री को पुरुष की "अर्धांगिनी" कहा गया है।
  • वैदिक यज्ञों का विस्तृत वर्णन मिलता है।

उपनिषद

उपनिषदों को वेदांत भी कहा जाता है।

प्रमुख उपनिषद

  • ईश
  • केन
  • कठ
  • प्रश्न
  • मुण्डक
  • माण्डूक्य
  • छांदोग्य
  • बृहदारण्यक

महत्व

उपनिषद भारतीय दर्शन के मूल आधार हैं तथा आत्मा, ब्रह्म, मोक्ष एवं कर्म सिद्धांत की व्याख्या करते हैं।

पुराण

भारतीय ऐतिहासिक परंपरा का क्रमबद्ध विवरण पुराणों में मिलता है।

प्रमुख तथ्य

  • कुल 18 महापुराण।
  • परंपरा के अनुसार रचयिता — लोमहर्षण एवं उनके पुत्र उग्रश्रवा।

ऐतिहासिक महत्व

राजवंशों की वंशावलियाँ विशेष रूप से निम्न पुराणों में मिलती हैं—

  • मत्स्य पुराण
  • वायु पुराण
  • विष्णु पुराण
  • ब्रह्माण्ड पुराण
  • भागवत पुराण

विशेष तथ्य

स्त्रियाँ एवं शूद्र, जिन्हें वेद अध्ययन की अनुमति नहीं थी, पुराणों का श्रवण कर सकते थे।

स्मृतियाँ

स्मृतियाँ सामाजिक एवं विधिक व्यवस्था की जानकारी देती हैं।

प्रमुख स्मृतियाँ

  • मनुस्मृति
  • याज्ञवल्क्य स्मृति
  • नारद स्मृति
  • बृहस्पति स्मृति

ऐतिहासिक महत्व

  • मनुस्मृति को सबसे प्राचीन एवं प्रभावशाली स्मृति माना जाता है।
  • नारद स्मृति से गुप्तकालीन व्यवस्था की जानकारी मिलती है।

बौद्ध साहित्य

त्रिपिटक

बौद्ध धर्म के प्रमुख ग्रंथ—

  1. विनय पिटक
  2. सुत्त पिटक
  3. अभिधम्म पिटक

जातक कथाएँ

इनमें बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाएँ वर्णित हैं।

कथावत्थु

हीनयान बौद्ध साहित्य का महत्वपूर्ण ग्रंथ।

जैन साहित्य

जैन धर्म के धार्मिक ग्रंथों को आगम कहा जाता है।

प्रमुख ग्रंथ

  • कल्पसूत्र
  • भगवती सूत्र
  • आचारांग सूत्र

ऐतिहासिक महत्व

महावीर स्वामी के जीवन तथा समकालीन राज्यों की जानकारी प्राप्त होती है।

लौकिक एवं ऐतिहासिक साहित्य

अर्थशास्त्र

लेखक — चाणक्य (कौटिल्य / विष्णुगुप्त)

प्रमुख तथ्य

  • 15 अधिकरण
  • लगभग 180 प्रकरण

महत्व

मौर्यकालीन प्रशासन, कर व्यवस्था, कूटनीति तथा अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्रोत।

अष्टाध्यायी

लेखक — पाणिनि

महत्व

  • संस्कृत व्याकरण का महान ग्रंथ।
  • महाजनपद कालीन भारत की जानकारी देता है।

महाभाष्य

लेखक — पतंजलि

महत्व

शुंगकालीन इतिहास के अध्ययन में उपयोगी।


राजतरंगिणी

लेखक — कल्हण

महत्व

  • संस्कृत में लिखित प्रथम व्यवस्थित ऐतिहासिक ग्रंथ।
  • कश्मीर का इतिहास।

चचनामा

लेखक — अली अहमद

महत्व

सिंध पर अरब विजय का विवरण।

ईसा पूर्व (BC/BCE) एवं ईस्वी (AD/CE)

आधुनिक काल में इतिहास लेखन में दो प्रकार की समय-गणना प्रचलित है—

पुरानी पद्धति

  • BC (Before Christ)
  • AD (Anno Domini)

आधुनिक एवं वैज्ञानिक पद्धति

  • BCE (Before Common Era)
  • CE (Common Era)

आज अधिकांश इतिहासकार BCE तथा CE का प्रयोग करते हैं।

विदेशी यात्रियों एवं लेखकों के विवरण

यूनानी एवं रोमन लेखक

टेसियस (Ctesias)

ईरान का राजवैद्य। इसका विवरण अनेक काल्पनिक कथाओं से युक्त है।

हेरोडोटस

  • "इतिहास का पिता"
  • पुस्तक — Histories

मेगास्थनीज

  • सेल्यूकस निकेटर का राजदूत
  • चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया

पुस्तक

इण्डिका (Indica)

महत्व

मौर्यकालीन प्रशासन, समाज एवं अर्थव्यवस्था का वर्णन।

डाइमेकस

बिन्दुसार के दरबार में आया यूनानी राजदूत।

डायोनिसियस

अशोक के समय भारत आया यूनानी दूत।

टॉलमी

पुस्तक — Geography

प्लिनी

पुस्तक — Natural History

पेरिप्लस ऑफ द एरिथ्रियन सी

भारतीय बंदरगाहों एवं समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण विवरण।

चीनी यात्री

फाह्यान (Fa-Hien)

  • चन्द्रगुप्त द्वितीय के समय आया।
  • गुप्तकालीन समाज का वर्णन।

ह्वेनसांग (Xuanzang)

  • हर्षवर्धन के समय भारत आया।
  • 629–645 ई. के बीच भारत में रहा।
  • नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन किया।

पुस्तक

सी-यू-की (Si-Yu-Ki)

महत्व

हर्षकालीन राजनीति, धर्म एवं शिक्षा का प्रमुख स्रोत।

विशेष तथ्य

उस समय नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य शीलभद्र थे।

इत्सिंग (I-Tsing)

  • 7वीं शताब्दी के अंत में भारत आया।
  • नालंदा तथा बौद्ध शिक्षा का विवरण दिया।

अरब लेखक

अलबरूनी

  • महमूद गजनवी के साथ भारत आया।
  • पुस्तक — तहकीक-ए-हिन्द (किताब-उल-हिन्द)

महत्व

भारतीय समाज, धर्म, विज्ञान एवं दर्शन का विस्तृत विवरण।

इब्न बतूता

  • 1333 ई. में भारत आया।
  • मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा काजी नियुक्त।

पुस्तक

रिहला (Rihla)

अन्य विदेशी लेखक

तारानाथ

तिब्बती विद्वान, जिनकी रचनाओं से बौद्ध इतिहास की जानकारी मिलती है।

मार्को पोलो

13वीं शताब्दी के अंत में दक्षिण भारत आया।

पुरातात्त्विक साक्ष्य

पुरातत्व प्राचीन इतिहास का सबसे विश्वसनीय स्रोत माना जाता है।

इसके अंतर्गत आते हैं—

  • अभिलेख
  • सिक्के
  • स्मारक
  • मूर्तियाँ
  • उत्खनन
  • स्थापत्य अवशेष

महत्वपूर्ण पुरातात्त्विक तथ्य

बोगाजकोई (Boghazkoi) अभिलेख

लगभग 1400 ईसा पूर्व के इस अभिलेख में वैदिक देवताओं—

  • मित्र
  • वरुण
  • इन्द्र
  • नासत्य

का उल्लेख मिलता है।

हेलियोडोरस स्तम्भ

विदिशा (वेसनगर) में स्थित।

भागवत धर्म के विकास का महत्वपूर्ण प्रमाण।

हाथीगुम्फा अभिलेख

कलिंग नरेश खारवेल का अभिलेख।

"भारतवर्ष" शब्द का प्रारम्भिक उल्लेख मिलता है।

सोहगौरा ताम्रपत्र

भारत में अकाल (दुर्भिक्ष) का सबसे प्राचीन अभिलेखीय प्रमाण।

भीतरी स्तम्भ लेख

हूण आक्रमण की जानकारी प्रदान करता है।

एरण अभिलेख

सती प्रथा का प्रारम्भिक अभिलेखीय प्रमाण।

मंदसौर अभिलेख

रेशम बुनकरों की श्रेणियों की जानकारी देता है।

बुर्जहोम

कश्मीर का नवपाषाण स्थल।

यहाँ गर्त-निवास (Pit Dwelling) मिले हैं।

सिक्कों से प्राप्त जानकारी

आहत सिक्के (Punch Marked Coins)

भारत के सर्वप्राचीन सिक्के।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • सिक्कों पर लेख अंकित करने की परंपरा सर्वप्रथम इंडो-ग्रीक (यवन) शासकों ने प्रारम्भ की।
  • समुद्रगुप्त की वीणा वादन मुद्रा उसके संगीत प्रेम का प्रमाण है।
  • अरिकमेडू (पुदुचेरी) से रोमन सिक्के प्राप्त हुए हैं।

भारतीय मंदिर स्थापत्य शैली

नागर शैली

  • उत्तर भारत
  • शिखर ऊँचा एवं वक्राकार

द्रविड़ शैली

  • दक्षिण भारत
  • पिरामिडाकार विमाना

वेसर शैली

  • नागर एवं द्रविड़ शैली का मिश्रित रूप
  • मुख्यतः दक्कन क्षेत्र में विकसित

पंचायतन मंदिर शैली

जब मुख्य मंदिर चार सहायक मंदिरों से घिरा होता है, तब उसे पंचायतन शैली कहते हैं।

प्रमुख उदाहरण

  • कंदारिया महादेव मंदिर (खजुराहो)
  • लक्ष्मण मंदिर (खजुराहो)
  • दशावतार मंदिर (देवगढ़)
  • लिंगराज मंदिर (भुवनेश्वर)
  • ब्रह्मेश्वर मंदिर (भुवनेश्वर)
  • गोंडेश्वर मंदिर (महाराष्ट्र)

महत्वपूर्ण अभिलेख एवं संबंधित शासक

अभिलेखसंबंधित शासक
हाथीगुम्फा अभिलेखखारवेल
जूनागढ़ (गिरनार) अभिलेखरुद्रदामन
नासिक अभिलेखगौतमी बलश्री
प्रयाग स्तम्भ लेखसमुद्रगुप्त
ऐहोल अभिलेखपुलकेशिन द्वितीय
मंदसौर अभिलेखयशोधर्मन
ग्वालियर अभिलेखप्रतिहार भोज
भीतरी अभिलेखस्कन्दगुप्त
देवपाड़ा अभिलेखविजयसेन

परीक्षा हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य

  • सबसे प्राचीन वेद — ऋग्वेद
  • भारतीय संगीत का जनक — सामवेद
  • सबसे नवीन वेद — अथर्ववेद
  • प्रथम ऐतिहासिक ग्रंथ — राजतरंगिणी
  • मौर्यकाल का प्रमुख स्रोत — अर्थशास्त्र एवं इण्डिका
  • गुप्तकाल का प्रमुख विदेशी स्रोत — फाह्यान
  • हर्षकाल का प्रमुख विदेशी स्रोत — ह्वेनसांग
  • प्राचीनतम सिक्के — आहत सिक्के
  • भारत में अकाल का प्रथम अभिलेखीय प्रमाण — सोहगौरा ताम्रपत्र
  • सती प्रथा का प्रथम अभिलेखीय प्रमाण — एरण अभिलेख
  • भारतवर्ष शब्द का प्रारम्भिक उल्लेख — हाथीगुम्फा अभिलेख

GK – First in India - Part 2

 

GK – First in India 

राजनीति एवं प्रशासन

भारत के प्रथम राष्ट्रपति

उत्तर: Dr. Rajendra Prasad (1950)

भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति

उत्तर: Dr. Sarvepalli Radhakrishnan

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री

उत्तर: Jawaharlal Nehru

भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल

उत्तर: C. Rajagopalachari

100 Chemical Formula to Compound Name Questions and Answers for Competitive Exams

 

100 Important Chemical Formulas: Formula to Compound Name

1. H₂O
Ans - Water

2. NaCl
Ans - Common Salt (Sodium Chloride)

3. CO₂
Ans - Carbon Dioxide

4. CO
Ans - Carbon Monoxide

भारत के प्रधानमंत्रियों की सूची 1947 से 2026 तक | Prime Ministers of India in Hindi

भारत के प्रधानमंत्री (Prime Ministers of India)

भारत के प्रधानमंत्री देश के शासनाध्यक्ष (Head of Government) होते हैं। वे मंत्रिपरिषद के प्रमुख होते हैं तथा वास्तविक कार्यपालिका शक्ति उनके पास होती है। स्वतंत्रता के बाद से अब तक 15 व्यक्तियों ने भारत के प्रधानमंत्री का पद संभाला है।

1. जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru)

जन्म: 14 नवम्बर 1889, इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)
मृत्यु: 27 मई 1964, नई दिल्ली

पूर्व पद

  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष
  • अंतरिम सरकार (1946) के उपाध्यक्ष
  • स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेता

भारत के सभी राष्ट्रपति (1950–2026): जीवन परिचय, जन्म-मृत्यु, कार्यकाल, पूर्व पद एवं महत्वपूर्ण तथ्य (List of Presidents of India)

भारत के सभी राष्ट्रपति (1950–2026): जीवन परिचय, जन्म-मृत्यु, कार्यकाल, पूर्व पद एवं महत्वपूर्ण GK तथ्य

भारत का राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रमुख, प्रथम नागरिक तथा भारतीय सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर होता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 52 के अंतर्गत राष्ट्रपति पद का प्रावधान किया गया है। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ भारत गणराज्य बना और डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने। वर्तमान में (2026 तक) द्रौपदी मुर्मु भारत की 15वीं राष्ट्रपति हैं।

1. डॉ. राजेंद्र प्रसाद (1884–1963)

जन्म एवं प्रारंभिक जीवन

  • जन्म: 3 दिसंबर 1884
  • जन्म स्थान: जीरादेई, सारण, बिहार

निधन

  • 28 फरवरी 1963

राष्ट्रपति कार्यकाल

  • 26 जनवरी 1950 – 13 मई 1962

GK – First in India - Part 1

. भारत का पहला डाकघर (First Post Office in India)

उत्तर: कोलकाता (1727 ई.)

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1727 में कोलकाता में भारत का पहला डाकघर स्थापित किया। बाद में डाक व्यवस्था पूरे देश में विस्तारित हुई और आधुनिक भारतीय डाक प्रणाली का आधार बनी।

2. भारत का पहला टेस्ट ट्यूब बेबी (First Test Tube Baby of India)

उत्तर: दुर्गा (कनुप्रिया अग्रवाल) – 3 अक्टूबर 1978

भारत की पहली वैज्ञानिक रूप से मान्यता प्राप्त टेस्ट ट्यूब बेबी "दुर्गा" थी, जिसका जन्म डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय के प्रयासों से हुआ।

3. भारत आने वाला पहला ब्रिटिश व्यक्ति

उत्तर: कैप्टन विलियम हॉकिन्स (1608)

विलियम हॉकिन्स सम्राट जहाँगीर के दरबार में पहुँचे और ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक हितों का प्रतिनिधित्व किया।

90 Most Important Chemical Formula Questions for Competitive Exams - GK- Science

1. Chemical formula for water is
Ans - H₂O

2. Chemical formula for common salt is
Ans - NaCl

3. Chemical formula for sulphuric acid is
Ans - H₂SO₄

4. Chemical formula for hydrochloric acid is
Ans - HCl

5. Chemical formula for nitric acid is
Ans - HNO₃

GK - प्राचीन इतिहास

नन्दवंश के घनानंद को चन्द्रगुप्त मौर्य ने युध्द में पराजित किया और मगध पर एक नये वंश ‘मौर्य वंश’ की स्थापना की । 

1. मौर्य साम्राज्य की स्थापना किसने की थी -

ANS - चन्द्रगुप्त मौर्य

2. प्रथम भारतीय साम्राज्य स्थापित किया गया -

ANS - चन्द्रगुप्त मौर्य द्वारा 

3. विक्रम सवंत कब से प्रारम्भ हुआ?

ANS -  58 ई० पू०

GK - भारत का इतिहास : परिचय, महत्व एवं काल विभाजन

भारत का इतिहास : एक परिचय

भारत विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं और संस्कृतियों में से एक का धनी देश है। उत्तर में विशाल हिमालय पर्वतमाला से लेकर दक्षिण में हिन्द महासागर तक फैला यह भूभाग प्राचीन ग्रंथों में "भारतवर्ष" के नाम से वर्णित है। महाकाव्यों एवं पुराणों में इसे "भारतवर्ष" अर्थात् "भरत के वंशजों का देश" कहा गया है तथा यहाँ के निवासियों को "भारती" अथवा "भारत की सन्तान" के रूप में संबोधित किया गया है।

भारत का उल्लेख विभिन्न कालों में अलग-अलग नामों से मिलता है। प्राचीन यूनानी (Greeks) इसे "इंडिका (Indica)" तथा "इंडिया (India)" कहते थे, जो सिंधु (Indus) नदी के नाम से विकसित हुआ। फारसी एवं मध्यकालीन मुस्लिम इतिहासकारों ने इस देश को "हिन्द" तथा "हिन्दुस्तान" कहा। वर्तमान में यह देश आधिकारिक रूप से "भारत" और "इंडिया" दोनों नामों से जाना जाता है, जैसा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में उल्लेखित है—"India, that is Bharat"।

GK - भारत रत्‍न

भारत रत्‍न


                                          स्थापना वर्ष  -  १९५४

पदक विवरण -  एक पीपल के पत्ते पर सूर्य की प्लैटिनम छवि के संग देवनागरी लिपि में खुदा हुआ भारत रत्न

प्रथम अलंकृत व्यक्ति -  सर्वपल्ली राधाकृष्णन


भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है। इन सेवाओं में कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल शामिल है। 
 एक वर्ष में अधिकतम तीन व्यक्तियों को ही भारत रत्न दिया जा सकता है।

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