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GK – शैव धर्म (Shaivism): कापालिक, कालमुख, लिंगायत, नाथ सम्प्रदाय एवं दक्षिण भारत में शैव धर्म | भाग-2

प्रश्न 21. कापालिक सम्प्रदाय क्या था?

उत्तर:
कापालिक सम्प्रदाय शैव धर्म की एक तांत्रिक शाखा थी। इसके अनुयायी भगवान भैरव को अपना इष्टदेव मानते थे। 'कापालिक' शब्द संस्कृत के कपाल (खोपड़ी) से बना है। इस सम्प्रदाय के साधु मानव कपाल को धारण करते थे, जिससे इनका यह नाम पड़ा। प्रारम्भिक मध्यकाल में यह सम्प्रदाय दक्षिण भारत एवं मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों में अधिक प्रचलित था।

प्रश्न 22. कापालिक सम्प्रदाय के इष्टदेव कौन थे?

उत्तर:
कापालिक सम्प्रदाय के इष्टदेव भगवान भैरव थे, जिन्हें भगवान शिव का उग्र एवं तांत्रिक स्वरूप माना जाता है।

प्रश्न 23. कापालिक सम्प्रदाय का प्रमुख केन्द्र कहाँ था?

उत्तर:
इतिहासकारों के अनुसार कापालिक सम्प्रदाय का प्रमुख केन्द्र श्रीशैल (वर्तमान आंध्र प्रदेश) था। यह स्थान आज भी भगवान मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के कारण प्रसिद्ध है।

प्रश्न 24. कापालिक सम्प्रदाय की प्रमुख विशेषताएँ क्या थीं?

उत्तर:
कापालिक साधुओं की प्रमुख विशेषताएँ थीं—

  • भैरव की उपासना

  • तांत्रिक साधनाएँ

  • शरीर पर भस्म लगाना

  • कपाल धारण करना

  • श्मशान साधना

  • वैराग्य एवं कठोर तप

प्रतियोगी परीक्षाओं में कापालिक सम्प्रदाय का संबंध भैरव उपासना से विशेष रूप से पूछा जाता है।

प्रश्न 25. कालमुख सम्प्रदाय क्या था?

उत्तर:
कालमुख सम्प्रदाय शैव धर्म की एक अन्य शाखा थी। यह कर्नाटक और दक्षिण भारत में विशेष रूप से प्रचलित थी। इस सम्प्रदाय के अनुयायी शिवभक्ति के साथ कठोर तप एवं मठ-आधारित धार्मिक जीवन का पालन करते थे।

प्रश्न 26. कालमुख सम्प्रदाय के अनुयायियों को किस नाम से जाना जाता था?

उत्तर:
शिवपुराण में कालमुख सम्प्रदाय के अनुयायियों को महाव्रतधर कहा गया है।

प्रश्न 27. कालमुख सम्प्रदाय की प्रमुख विशेषताएँ क्या थीं?

उत्तर:

  • भगवान शिव की उपासना

  • शरीर पर भस्म धारण करना

  • कठोर तपस्या

  • मठों में निवास

  • धार्मिक अनुशासन का पालन

पुराने ग्रंथों में इनके बारे में कुछ अतिरंजित विवरण भी मिलते हैं, इसलिए आधुनिक इतिहासकार उन विवरणों को सावधानी से स्वीकार करते हैं।

प्रश्न 28. लिंगायत सम्प्रदाय क्या है?

उत्तर:
लिंगायत सम्प्रदाय शैव धर्म की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जिसका विकास मुख्यतः कर्नाटक में हुआ। इसके अनुयायी अपने शरीर पर एक छोटा इष्टलिंग धारण करते हैं और प्रत्यक्ष रूप से भगवान शिव की उपासना करते हैं।

प्रश्न 29. लिंगायत सम्प्रदाय को अन्य किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर:
लिंगायत सम्प्रदाय को वीरशैव सम्प्रदाय भी कहा जाता है।

प्रश्न 30. लिंगायत सम्प्रदाय के प्रमुख प्रवर्तक कौन थे?

उत्तर:
12वीं शताब्दी में बसव (बसवन्ना) ने इस सम्प्रदाय के संगठन एवं व्यापक प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसलिए अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाओं में बसव को लिंगायत आन्दोलन का प्रमुख नेता माना जाता है।

प्रश्न 31. बसव कौन थे?

उत्तर:
बसव (बसवन्ना) 12वीं शताब्दी के महान समाज सुधारक, दार्शनिक तथा शिवभक्त थे। उन्होंने जाति-भेद, छुआछूत एवं सामाजिक असमानता का विरोध किया तथा समानता, श्रम और भक्ति पर बल दिया।

प्रश्न 32. लिंगायत सम्प्रदाय के अनुयायियों को किस नाम से जाना जाता था?

उत्तर:
लिंगायत सम्प्रदाय के अनुयायियों को जंगम भी कहा जाता था।

प्रश्न 33. लिंगायत सम्प्रदाय का प्रमुख धार्मिक ग्रंथ कौन-सा है?

उत्तर:
शून्य सम्पादने (Shunya Sampadane) लिंगायत परम्परा का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। इसके अतिरिक्त बसवन्ना के वचन साहित्य का भी अत्यधिक महत्व है।

प्रश्न 34. लिंगायत सम्प्रदाय की प्रमुख शिक्षाएँ क्या हैं?

उत्तर:

  • केवल शिव की उपासना

  • व्यक्तिगत इष्टलिंग धारण करना

  • जाति-भेद का विरोध

  • स्त्री-पुरुष समानता

  • श्रम की महत्ता

  • सामाजिक समरसता

प्रश्न 35. नाथ सम्प्रदाय क्या है?

उत्तर:
नाथ सम्प्रदाय शैव योग परम्परा की एक प्रसिद्ध शाखा है, जिसमें योग, ध्यान, हठयोग तथा आत्म-साधना को विशेष महत्व दिया गया। इस सम्प्रदाय का भारतीय योग परम्परा के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है।

प्रश्न 36. नाथ सम्प्रदाय का प्रारम्भिक प्रवर्तक किसे माना जाता है?

उत्तर:
नाथ सम्प्रदाय की प्रारम्भिक परम्परा मत्स्येन्द्रनाथ से जुड़ी मानी जाती है।

प्रश्न 37. नाथ सम्प्रदाय का सर्वाधिक प्रसिद्ध गुरु कौन था?

उत्तर:
नाथ सम्प्रदाय के सर्वाधिक प्रसिद्ध गुरु गुरु गोरखनाथ थे। उन्होंने इस सम्प्रदाय को पूरे भारत में लोकप्रिय बनाया।

प्रश्न 38. गोरखनाथ का भारतीय संस्कृति में क्या योगदान है?

उत्तर:
गोरखनाथ ने योग, हठयोग, साधना तथा आध्यात्मिक अनुशासन को जनसामान्य तक पहुँचाया। उनके प्रभाव से नाथ सम्प्रदाय उत्तर भारत, नेपाल तथा अन्य क्षेत्रों में व्यापक रूप से फैल गया।

प्रश्न 39. दक्षिण भारत में शैव धर्म का सबसे अधिक विकास किन राजवंशों के समय हुआ?

उत्तर:
दक्षिण भारत में शैव धर्म का विशेष विकास निम्नलिखित राजवंशों के संरक्षण में हुआ—

  • पल्लव

  • चालुक्य

  • राष्ट्रकूट

  • चोल

  • होयसल

प्रश्न 40. पल्लव शासकों का शैव धर्म में क्या योगदान था?

उत्तर:
पल्लव शासकों ने अनेक शैव मंदिरों का निर्माण कराया तथा शैव संतों को संरक्षण दिया। इनके शासनकाल में शैव भक्ति आन्दोलन को नई गति मिली।

प्रश्न 41. नायनार कौन थे?

उत्तर:
नायनार दक्षिण भारत के महान शैव संत थे जिन्होंने भक्ति आन्दोलन के माध्यम से भगवान शिव की उपासना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया।

प्रश्न 42. नायनार संतों की संख्या कितनी मानी जाती है?

उत्तर:
परम्परा के अनुसार 63 नायनार संत माने जाते हैं।

प्रश्न 43. प्रमुख नायनार संत कौन-कौन थे?

उत्तर:

  • अप्पार

  • तिरुज्ञान सम्बन्दर

  • सुंदरर

  • मणिक्कवाचकर (यद्यपि परम्परा में उनका विशेष स्थान है)

प्रश्न 44. राष्ट्रकूटों का शैव धर्म में क्या योगदान था?

उत्तर:
राष्ट्रकूट शासकों ने एलोरा में विश्वप्रसिद्ध कैलाश मंदिर का निर्माण कराया, जो भारतीय शैलकृत वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति माना जाता है।

प्रश्न 45. एलोरा का कैलाश मंदिर किसने बनवाया?

उत्तर:
एलोरा का कैलाश मंदिर राष्ट्रकूट शासक कृष्ण प्रथम द्वारा 8वीं शताब्दी में बनवाया गया माना जाता है।

प्रश्न 46. चोल शासकों का शैव धर्म में क्या योगदान था?

उत्तर:
चोल शासकों ने शैव धर्म को राजकीय संरक्षण दिया और दक्षिण भारत में भव्य शैव मंदिरों का निर्माण कराया। उनके काल में शैव कला, स्थापत्य एवं कांस्य मूर्तिकला का अभूतपूर्व विकास हुआ।

प्रश्न 47. बृहदीश्वर (राजराजेश्वर) मंदिर का निर्माण किसने कराया?

उत्तर:
तंजावुर स्थित प्रसिद्ध बृहदीश्वर (राजराजेश्वर) मंदिर का निर्माण चोल शासक राजराज प्रथम ने लगभग 1010 ईस्वी में कराया था। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों में सम्मिलित है।

प्रश्न 48. कुषाण शासकों की मुद्राओं पर किस देवता का अंकन मिलता है?

उत्तर:
कुषाण शासकों, विशेषकर विम कडफिसेस एवं कनिष्क के कुछ सिक्कों पर शिव तथा नंदी का अंकन मिलता है, जो उस समय शैव उपासना की लोकप्रियता का प्रमाण है।

प्रश्न 49. प्रतियोगी परीक्षाओं में शैव धर्म से सबसे अधिक पूछे जाने वाले तथ्य कौन-कौन से हैं?

उत्तर:

  • ऋग्वेद में शिव = रुद्र

  • अथर्ववेद = भव, शर्व, पशुपति

  • सबसे प्राचीन सम्प्रदाय = पाशुपत

  • संस्थापक = लकुलीश

  • लिंगायत आन्दोलन = बसवन्ना

  • 63 नायनार संत

  • कैलाश मंदिर = राष्ट्रकूट, कृष्ण प्रथम

  • बृहदीश्वर मंदिर = राजराज प्रथम

प्रश्न 50. शैव धर्म भारतीय संस्कृति के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर:
शैव धर्म ने भारतीय दर्शन, भक्ति आन्दोलन, योग, तंत्र, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, मंदिर स्थापत्य तथा साहित्य को गहराई से प्रभावित किया। नटराज, अर्धनारीश्वर, ज्योतिर्लिंग, शिवलिंग, कैलाश मंदिर और बृहदीश्वर मंदिर जैसी परम्पराएँ आज भी इसकी सांस्कृतिक समृद्धि का प्रमाण हैं। भारतीय सभ्यता के विकास में शैव धर्म का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

परीक्षा की दृष्टि से Quick Revision

विषयमहत्वपूर्ण तथ्य
कापालिकइष्टदेव – भैरव
कालमुखमहाव्रतधर
लिंगायतबसवन्ना, इष्टलिंग
दूसरा नामवीरशैव
नाथ सम्प्रदायमत्स्येन्द्रनाथ
प्रसिद्ध गुरुगोरखनाथ
नायनार63 संत
कैलाश मंदिरराष्ट्रकूट, कृष्ण प्रथम
बृहदीश्वर मंदिरराजराज प्रथम
सिक्कों पर शिवकुषाण शासक


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